विशेष पूजा

अंजनेय स्वामी पत्ती पूजा

"पत्ते की पूजा" भगवान अंजनेय की सबसे अनूठी और प्रिय पूजाओं में से एक है। भक्तों का मानना ​​है कि पान के पत्तों से भगवान की पूजा करने से उनकी…

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इस पूजा के बारे में

"आकु पूजा" श्री अंजनेय स्वामी की सबसे अनोखी और सबसे प्रिय पूजाओं में से एक है। भक्तों का मानना ​​है कि पान के पत्तों से भगवान की पूजा करने से मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं और विशेषकर शनि दोष दूर हो जाते हैं।

 

यहां इस पूजा का पूरा विवरण और विशिष्टता दी गई है:

 

पत्ता पूजा विशिष्टता

रामायण गाथा के अनुसार, जब हनुमान ने सीथम्मा का पता लगाया और उसे समझाया, तो सीतम्मा बहुत खुश हुईं और पास के पान के पत्तों को काटकर हनुमान के सिर पर रखकर हनुमान को आशीर्वाद दिया। तब से भगवान की पत्ती पूजा करना एक परंपरा बन गई है।

 

पूजा के लाभ

सफलता: किए गए कार्यों में सफलता मिलती है।

शनि दोष उपाय: उस दिन शनि या अन्य शनि दोषों का प्रभाव कम हो जाएगा।

कठिनाइयों से मुक्ति : मानसिक चिंताएं और भय दूर होते हैं और साहस की प्राप्ति होती है।

आयुराजोग्य : स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां दूर होती हैं और आयु बढ़ती है।

 

पूजा के लिए

पान के पत्ते: ताजे, कच्चे पान के पत्ते (आमतौर पर 108 या अधिक)।

चंदन और केसर: पत्तों पर लिखने के लिए।

मारेडु बल या तुलसी: अतिरिक्त पूजा के लिए।

 

पूजा की प्रक्रिया

शुद्धि: पूजा के लिए उपयोग किए जाने वाले पान के पत्तों को साफ करके सुखा लेना चाहिए।

नाम शिलालेख: प्रत्येक पान के पत्ते के ऊपर चंदन या केसर से "श्री राम" लिखना बहुत विशेष है। हनुमान को राम नाम अत्यंत प्रिय है।

अष्टोत्तर शतनामावली: भगवान हनुमान (हनुमान अष्टोत्तरम) के 108 नामों का जाप करते हुए, प्रत्येक नाम के लिए एक पत्ता भगवान के चरणों में या मूर्ति पर चढ़ाना चाहिए।

सजावट: कुछ क्षेत्रों में, पान के पत्तों को माला में बांधा जाता है और भगवान को अर्पित किया जाता है (पत्ते की माला)।

प्रसाद: प्रसाद के रूप में वडप्पू, पेय या केला चढ़ाया जाता है।

 

इसे कब निष्पादित किया जाना चाहिए?

मंगलवार और शनिवार: ये दो दिन अंजनेय स्वामी के लिए सबसे शुभ हैं।

हनुमज्जयंती: भगवान के जन्मदिन पर आकु पूजा करना सबसे शुभ होता है।

मूल नक्षत्र: यह पूजा हनुमान के जन्म नक्षत्र मूल नक्षत्र पर विशेष फल देती है।

 

एक छोटा सा रहस्य: किंवदंती है कि सुपारी में "कामधेनु" का वास होता है। ऐसे पवित्र पत्ते पर राम का नाम लिखकर भगवान की पूजा करने से सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।

 

यह अनुष्ठान पूजा फल से जुड़े पुजारियों द्वारा पारंपरिक और शुद्ध तरीके से, भक्तों के नाम और गोत्र का उल्लेख करते हुए, केवल ऑनलाइन ही संपन्न किया जाता है। संपूर्ण पूजा की वीडियो रिकॉर्डिंग भक्तों के व्हाट्सएप पर भेजी जाती है।

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