विशेष पूजा

दक्षिणामूर्ति पूजा

श्री दक्षिणामूर्ति पूजा एक अत्यंत पवित्र उपासना है जो ज्ञान, बुद्धि और आत्मज्ञान प्रदान करती है। दक्षिणामूर्ति भगवान शिव का गुरु रूप हैं, जो ऋषियों को वेदों का अर्थ मौन…

₹816 से
✅ सत्यापित पंडित| 🏠 आपके द्वार तक
dakshinamurthy puja

इस पूजा के बारे में

श्री दक्षिणामूर्ति पूजा सबसे शुभ पूजा है जो ज्ञान, बुद्धि और आत्म-ज्ञान प्रदान करती है। दक्षिणामूर्ति भगवान शिव का रूप हैं जो साक्षात गुरु के रूप में हैं और मौन रहकर मुनियों को वेदों का अर्थ सिखाते हैं। यह पूजा छात्रों, शिक्षकों और आध्यात्मिक साधकों के लिए बहुत फायदेमंद है।

 

यहां इस पूजा की पूरी व्याख्या दी गई है:

 

दक्षिणामूर्ति विशिष्ठ

"दक्षिणा" का अर्थ है ज्ञान या बुद्धि, "अमूर्ति" का अर्थ है निराकार। इसका अर्थ है जो ज्ञान स्वरूप हो। वह दक्षिण की ओर मुख करके बैठते हैं, इसलिए उन्हें "दक्षिणामूर्ति" कहा जाता है।

 

पूजा के लाभ

शैक्षणिक सफलता: छात्रों की एकाग्रता और याददाश्त बढ़ती है। परीक्षा में अच्छे परिणाम।

ज्ञान की प्राप्ति: अज्ञात चीजों और ज्ञान को समझने की क्षमता।

गुरु अनुग्रहम: जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति दोष है उन्हें इस पूजा से अच्छे परिणाम मिलेंगे।

मानसिक शांति: भ्रम दूर होता है और मन स्पष्ट हो जाता है।

 

पूजा प्रक्रिया

दक्षिणामूर्ति पूजा आमतौर पर गुरुवार को की जाती है।

ध्यान : पूजा शुरू करने से पहले मन में स्वामी के स्वरूप की कल्पना करनी चाहिए। वह बरगद के पेड़ (वात वृक्ष) के नीचे बैठते हैं और चिन्मुद्रा पहनते हैं।

अभिषेकम: पंचामृत या शुद्ध जल से भगवान का अभिषेक किया जाता है।

सजावट: दक्षिणामूर्ति को पीले कपड़े और पीले फूल (चमंथी या तांगेडु) बहुत पसंद हैं। पीले सींगों की माला भी चढ़ाई जाती है।

मंत्र पाठ: इस पूजा में "दक्षिणामूर्ति अष्टकम" या मूल मंत्र का पाठ किया जाता है।

मूल मंत्र: "ओम नमो भगवते दक्षिणामूर्तये मह्यं मेधं प्रजनं प्रयच्छ स्वाहा"

अर्पण: इस पूजा में चने (अंकुरित या उबले हुए) का अर्पण करना सबसे महत्वपूर्ण है।

 

दक्षिणामूर्ति ध्यान श्लोक

पूजा के दौरान इस श्लोक का पाठ करने से विशेष फल मिलता है:

"गुरवे सर्वलोकनं भिषजे भवारोगिनम | निधाये सर्वविद्यानं दक्षिणामूर्तये नमः ||"

 

इसे कब निष्पादित किया जाना चाहिए?

गुरुवार: दक्षिणामूर्ति के लिए गुरुवार सप्ताह का सबसे शुभ दिन है।

गुरु पूर्णिमा: साल की अगली गुरु पूर्णिमा पर यह पूजा करने से मिलेगा करोड़ों फल।

कार्तिक माह: कार्तिक माह में भी विशेष पूजा की जाती है क्योंकि यह शिव का स्वरूप है।

 

मुख्य सुझाव: दक्षिणामूर्ति पूजा करने के बाद प्रसाद के रूप में पीले रंग की सामग्री या शनागला बांटने से गुरु की कृपा शीघ्र प्राप्त होगी।

 

यह अनुष्ठान पूजा फल से जुड़े पुजारियों द्वारा पारंपरिक और शुद्ध तरीके से, भक्तों के नाम और गोत्र का उल्लेख करते हुए, केवल ऑनलाइन ही संपन्न किया जाता है। संपूर्ण पूजा की वीडियो रिकॉर्डिंग भक्तों के व्हाट्सएप पर भेजी जाती है।

यह पूजा बुक करें

₹816 से
सत्यापित पंडित
📦 सभी पूजा सामग्री शामिल
🔄 मुफ्त रद्दीकरण (24 घंटे)
🌐 ऑनलाइन और व्यक्तिगत विकल्प

* चेकआउट पर पूजा की तारीख, शहर और स्थान का विवरण भरें।

आपको यह भी पसंद आ सकता है

srinivasa kalyanam for the month of vaisakha
PujaPhal वैशाख माह के लिए श्रीनिवास कल्याणम्
कल्याण

वैशाख माह के लिए श्रीनिवास कल्याणम्

वैशाख माह हिंदू धर्म के सबसे पवित्र माहों में से एक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, तिरुमाला के…

Archana
PujaPhal अष्टोत्तर नामार्चना (108 नाम)

अष्टोत्तर नामार्चना (108 नाम)

देवता के 108 पवित्र नामों पर आधारित एक शुभ पूजा समारोह।

runa vimochana aishwarya paasupata homam
PujaPhal ऋण विमोचन ऐश्वर्य पाशुपता होमम्
होम और हवन

ऋण विमोचन ऐश्वर्य पाशुपता होमम्

श्री ऋणा विमोचन ऐश्वर्य पशुपत होमम, शिव की कृपा से आर्थिक कठिनाइयों को दूर करने और धन प्राप्ति…