हिंदू धर्म में, "गो-ग्रासम" (गाय को भोजन कराना) को अत्यंत शुभ कार्य माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि सभी देवताओं के निवास स्थान गाय को भोजन कराने से पूर्वजों के पाप दूर होते हैं और सभी प्रकार की शुभता प्राप्त होती है।
गो-ग्रासम अर्पित करने के उद्देश्य और महत्व का विवरण यहाँ दिया गया है:
गो-ग्रासम क्या है?
"गो" का अर्थ है गाय और "ग्रासम" का अर्थ है भोजन। गाय को हरी घास, चोकर, केले या भीगे हुए चावल/चने का दाना अर्पित करना गो-ग्रासम कहलाता है।
गाय-ग्रासम का महत्व
सभी देवताओं का आशीर्वाद: पौराणिक कथाओं के अनुसार, गाय के शरीर में 3 करोड़ देवता निवास करते हैं। गाय को भोजन कराने से सभी देवताओं की उपासना का फल प्राप्त होता है।
दोष निवारण: जिन लोगों की कुंडली में शनि और राहु ग्रह के दोष हैं और जिन्हें प्रजनन संबंधी समस्याएँ हैं, उन्हें गाय-ग्रासम अर्पित करने से राहत मिलती है।
पूर्वजों को प्रसन्न करना: ऐसा माना जाता है कि अमावस्या के दिन गाय को भोजन कराने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं।
गौ-घास संकल्प
दान करते समय 'संकल्प' कहने से उस दान का पुण्य हमें या जिन्हें हम दान करना चाहते हैं, उन्हें प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त होता है।
संकल्प विधि:
"परमेश्वर मेरी माता के सभी कष्टों से प्रसन्न हों, माता का स्वरूप सभी दिव्य वरदानों का स्रोत हो, मेरा परिवार स्वस्थ और समृद्ध हो, पिता शांति के स्रोत हों, मैं उन्हें गौ-घास अर्पित करता हूँ।"
महत्वपूर्ण श्लोक: गाय को चारा खिलाते समय इस श्लोक का पाठ करना शुभ होता है:
"सौरभेय्यः सर्वहिताः पवित्रः पुण्यरसायः | प्रतिगृह्यन्तु मे ग्रासं गवस्त्रैलोक्य मतरः ||" (अर्थ: हे समस्त लोकों की माता! हे पवित्र और धन्य माता, मेरे द्वारा अर्पित इस भोजन को स्वीकार करें और मुझे आशीर्वाद दें।)
गाय-ग्रासम अर्पित करते समय पालन किए जाने वाले नियम
विधि: भोजन को सीधे हाथ से परोसने के बजाय स्वच्छ पात्र या केले के पत्ते में अर्पित करना सम्मानजनक है। हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि गाय को हाथ से खिलाने से आपके भीतर की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।
क्या अर्पित करें?: हरी घास, भीगी हुई फलियाँ, गुड़ मिला हुआ तवा या फल अर्पित किए जा सकते हैं।
प्रदक्षिणा: ग्रासम अर्पित करने के बाद, गाय को तीन बार प्रदक्षिणा करें और प्रणाम करें।
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पंडित आपके नाम और गोत्र का उच्चारण करके देवता का आशीर्वाद मांगते हैं।
गो-ग्रास संकल्प
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