नर दृष्टि निवारण पूजा

नारा दृष्टि पूजा एक ऐसा अनुष्ठान है जो ईर्ष्या, द्वेष या दूसरों की बुरी नज़र के नकारात्मक प्रभावों को दूर करने के लिए किया जाता है। कहावत "नारा दृष्टि के…

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इस पूजा के बारे में

नारा दिष्टी प्रियाधि पूजा दूसरों की ईर्ष्या, घृणा या बुरी नजर के नकारात्मक प्रभावों को दूर करने की एक प्रक्रिया है। यह कहावत "एक काले पत्थर को भी एक राक्षस तोड़ सकता है" यह दर्शाता है कि हमारे समाज में एक राक्षस का प्रभाव कितना मजबूत है।

 

यहां नारा दिष्टी के लिए पूजा और उपायों का पूरा विवरण दिया गया है:

 

दिष्टी के लक्षण

अत्यधिक सुस्ती, बिना किसी कारण के जलन दर्द हैं।

घर में छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होते रहते हैं।

व्यापार में अचानक घाटा होना।

काम पूरा होने पर रुकना।

बच्चों का दूध न पीना या बिना वजह रोना।

 

पूजा और परिहारा प्रक्रियाएं

नारा दृष्टि को ठीक करने के लिए विभिन्न तरीकों से पूजा की जाती है:

  1. सुदर्शन नरसिम्हा पूजा
    उग्रनरसिम्हा स्वामी और सुदर्शन चक्र नारा दृष्टि को दूर करने में सबसे शक्तिशाली हैं।
    विधि: घर या मंदिर में सुदर्शन अष्टक का पाठ करते हुए भगवान नरसिम्हा का अभिषेक करने से बुरी आत्माएं दूर होंगी।
    परिणाम: शत्रु का भय दूर होता है और सुरक्षा कवच का निर्माण होता है।
  2. प्रत्यंगिरा देवी की पूजा
    प्रत्यंगिरा देवी की पूजा गुप्त बुराइयों, काले जादू आदि के प्रभाव को दूर करने के लिए की जाती है। इन्हें "अधर्वणा भद्रकाली" के नाम से भी जाना जाता है। सूखी मिर्च के साथ होमम (निक्रुम्बिल यागम) यहां विशेष है।
  3. दिष्टी गणपति पूजा
    दरवाजे के सामने 'दिष्टी गणपति' का नक्शा रखकर उसकी पूजा करने से घर में आने वाली नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

 

सामान्य उपाय
पूजा के साथ-साथ घर में कुछ स्वयं निर्मित विधियां:

कद्दू के उपाय: हरे कद्दू को हल्दी और कुमकुम से रंगकर उस पर दिष्टी की आकृति बनाकर घर के मुख्य द्वार के ऊपर बांध देना चाहिए। यह बाहरी लोगों की नजर को अपनी ओर मोड़ लेता है और गलती का आभास करा देता है।

नमक के पानी से स्नान: अत्यधिक प्यास लगने पर नहाने के पानी में थोड़ा सा समुद्री नमक मिलाकर स्नान करने से शरीर की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

नींबू दिष्टी: मंगलवार या शनिवार के दिन एक नींबू को आधा काटकर, उसमें केसर मिलाकर घर या व्यक्ति के लिए एक दिष्टी ले जाकर चार रास्तों के चौराहे पर रखनी चाहिए।

काली रस्सी: बच्चों या वयस्कों के लिए, बाएं पैर या हाथ पर काली रस्सी बांधने से बुरी आत्माओं को दूर रखने में मदद मिल सकती है।

 

इसे कब निष्पादित किया जाना चाहिए?

अमावस्या: दृष्टि उपाय के लिए अमावस्या सबसे उपयुक्त दिन है।

मंगलवार और शनिवार: इन दिनों अंजनेय स्वामी या दुर्गम्मा की पूजा करना और दिष्टी लेना अच्छा होता है।

सूर्यास्त का समय: पकवान लेने के लिए शाम का समय सर्वोत्तम है।

 

मुख्य सुझाव: "ओम नमशिवाय" या "हनुमान चालीसा" का जाप हमारे चारों ओर सकारात्मक ऊर्जा का एक चक्र बनाता है। यह हमें किसी भी बुरे प्रभाव से बचाता है।

 

यह अनुष्ठान पूजा फल से जुड़े पुजारियों द्वारा पारंपरिक और शुद्ध तरीके से, भक्तों के नाम और गोत्र का उल्लेख करते हुए, केवल ऑनलाइन ही संपन्न किया जाता है। संपूर्ण पूजा की वीडियो रिकॉर्डिंग भक्तों के व्हाट्सएप पर भेजी जाती है।

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