विशेष पूजा

मास शिवरात्रि पर विशेष शिव पार्वती कल्याणम

शिवरात्रि, जो प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है, भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे शुभ दिन है। भक्तों का मानना ​​है कि इस शुभ दिन…

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इस पूजा के बारे में

मास शिवरात्रि जो हर महीने कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को आती है, शिव पूजा के लिए सबसे शुभ दिन है। भक्तों का मानना ​​है कि इस शुभ दिन पर शिव पार्वती का कल्याणम पारिवारिक कलह को दूर करेगा और आपसी मेलजोल बढ़ाएगा।

 

यहां मास शिवरात्रि के विशेष शिव पार्वती कल्याणम के बारे में पूरी व्याख्या दी गई है:

 

कल्याणम विशिष्टत

शिव पार्वती कल्याणम सिर्फ एक दिव्य विवाह नहीं है, यह प्रकृति (पार्वती) और पुरुष (शिव) के मिलन का प्रतीक है। यह विवाह विश्व कल्याण के लिए, विश्व में शांति स्थापित करने के लिए किया जाता है।

 

कल्याण के लाभ

मंगलप्रदम्: जो युवक-युवतियां विवाह के लिए प्रयासरत हैं उनकी बाधाएं दूर होंगी और शीघ्र विवाह होगा।

दाम्पत्य सुख: पति-पत्नी के बीच वैमनस्य दूर होगा और पारस्परिकता बढ़ेगी।

संतान की प्राप्ति: जो लोग संतान की कामना करते हैं उन्हें इस कल्याण को करने से फल मिलेगा।

सर्व पाप हरणम्: पुराणों में कहा गया है कि शिव और पार्वती के विवाह को देखना या उसमें भाग लेना अश्वमेघ यज्ञ करने के समान पुण्यदायी है।

 

कल्याण प्रक्रिया

शिवरात्रि के महीने में मंदिरों में कल्याण बहुत धूमधाम से किया जाता है।

अनुजना और गणपति पूजा: विवाह समारोह बिना किसी विघ्न के संपन्न होने के लिए भगवान गणेश से प्रार्थना करें।

पुण्याहवाचन: पूजा द्रव्य और विवाह स्थल को पवित्र करना।

कंकण धारण: स्वामी और अम्मा को रक्षा बंधन (कंगन) बांधना।

प्रवर: शिव पर्वत के गोत्र नाम और वंशावली का पाठ करना (शिव शाश्वत पुरुष हैं इसलिए उनके गोत्र को पढ़ना विशेष है)।

मंगलसूत्र धारण: जबकि पंडित वैदिक मंत्रों का जाप करते हैं, शुभ समय के दौरान वे भगवान शिव की ओर से देवी पार्वती को मंगलसूत्र धारण करते हैं।

तालंबरस: स्वामी और अम्मावर का एक-दूसरे पर तालंबर डालना इस समारोह का सबसे खूबसूरत पल होता है।

महामंगला हरति: कल्याणम के पूरा होने के बाद सभी भक्त स्वामी अम्मावर के दर्शन करते हैं और हरति करते हैं।

 

मास शिवरात्रि का महत्व

मास शिवरात्रि पर चंद्रमा का प्रभाव कम होता है, जिससे मन को नियंत्रित करना आसान हो जाता है। इस दिन किया गया शिव कल्याणम या अभिषेक मन की इच्छाओं को नियंत्रित करता है और आध्यात्मिक उन्नति लाता है।

भक्त उपवास: शिवरात्रि के महीने में उपवास करना और कल्याणम में भाग लेना शुभ है।

रात्रि जागरण: विवाह के बाद रात्रि में शिव नाम स्मरण के साथ जागरण करने से दोगुना फल मिलता है।

प्रसाद: विवाह के बाद दिया गया प्रसाद श्रद्धापूर्वक ग्रहण करना चाहिए।

 

महत्वपूर्ण सुझाव: इस महीने की शिवरात्रि कल्याणम में रेशम के कपड़े या मंगलसूत्र चढ़ाने से विशेष रूप से उन लोगों को विवाह संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ेगा, जिससे दोष से बचाव होगा।

 

पूजा फल शास्त्रोक्त पूजा संबद्ध पुजारियों द्वारा पारंपरिक तरीके से, भक्त की पवित्रता, नाम और गोत्र के साथ विशेष रूप से ऑनलाइन आयोजित की जाती है। पूरी पूजा की वीडियो रिकॉर्डिंग भक्तों के व्हाट्सएप पर भेजी जाएगी.

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