अभिषेक

सुब्रह्मण्येश्वर स्वामी अभिषेकम

श्री सुब्रह्मण्येश्वर स्वामी (कार्तिकेय) का अभिषेक पूजा का सबसे शक्तिशाली रूप है। यह अभिषेक कुजा दोष के निवारण, संतान प्राप्ति और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में विशेष रूप से…

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subrahmanyeswara swamy abhishekam

इस पूजा के बारे में

श्री सुब्रह्मण्येश्वर स्वामी (कार्तिकेय) का अभिषेक पूजा का सबसे शक्तिशाली रूप है। यह अभिषेक कुजा दोष के निवारण, संतान प्राप्ति और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में विशेष रूप से सहायक होता है। सुब्रह्मण्य स्वामी को "ज्ञानशक्तिधर" कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि वे ज्ञान और शक्ति प्रदान करने वाले देवता हैं।

 

इस अभिषेक के बारे में पूरी जानकारी यहाँ दी गई है:

 

सुब्रह्मण्येश्वर स्वामी अभिषेक की विशेषताएँ
भगवान सुब्रह्मण्य पर किया गया अभिषेक कुंडली में ग्रहों के दोषों को दूर करता है। विशेष रूप से, मंगल दोष (मांगलिक दोष) और नाग दोष के प्रभाव कम होते हैं।

 

अभिषेक के लाभ
समृद्धि: संतान की प्रतीक्षा कर रहे दंपतियों को भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होगा।

कुजा दोष से बचाव: विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होंगी और विवाह शीघ्र संपन्न होगा।

स्वास्थ्य: त्वचा रोगों और मानसिक चिंताओं से राहत मिलेगी।

सफलता: प्रतियोगी परीक्षाओं, अदालती मामलों और शत्रुओं के विरुद्ध विजय प्राप्त होगी।

 

प्रयुक्त सामग्री - परिणाम
भगवान को अर्पित किए जाने वाले प्रत्येक अभिषेक के अपने विशेष गुण होते हैं:
दूध: आयु और स्वास्थ्य बढ़ाता है।

शहद: मधुर जीवन और शुद्ध वाणी प्रदान करता है।

पंचामृत: (दूध, दही, घी, चीनी और शहद का मिश्रण) सभी सुख प्रदान करता है। पलानी जैसे स्थानों में भगवान को पंचामृत अभिषेक बहुत प्रसिद्ध है।

विभूति: ज्ञान बढ़ाती है और पापों को दूर करती है।

पनीर: मन की शांति और प्रसिद्धि प्रदान करता है।

 

अभिषेक प्रक्रिया
1. विघ्नेश्वर पूजा: सर्वप्रथम, भगवान विनायक, जो कि बड़े भाई हैं, की पूजा की जाती है और निर्बाध दर्शन के लिए प्रार्थना की जाती है।

2. संकल्प: कुल के नामों का उच्चारण किया जाता है और अभिषेक के उद्देश्य (बाल्यावस्था, विवाह या ग्रह शांति) को व्यक्त किया जाता है।

3. षोडशोपचार पूजा: भगवान की 16 प्रकार की उपचार विधियों से पूजा की जाती है, जिनमें आह्वान, आसन आदि शामिल हैं।

4. अभिषेक: पुरुष सूक्तम, श्री सुब्रह्मण्यम अष्टोत्तरम और स्कंद षष्ठी कवचम का पाठ करते हुए भगवान की प्रतिमा पर दूध, दही, शहद आदि का लेप किया जाता है।

5. अलंकरण एवं आरती: अभिषेक के बाद, भगवान को चंदन, केसर, फूलों की माला (विशेषकर लाल फूलों की) से सुशोभित किया जाता है और कपूर का जल अर्पित किया जाता है।

 

अभिषेक कब करना चाहिए?

षष्ठी तिथि: प्रत्येक माह आने वाली शुद्ध षष्ठी तिथि भगवान स्वामी को अत्यंत प्रसन्न करती है।

सुब्रह्मण्य षष्ठी: मार्गशीर्ष माह में इस तिथि पर किया गया अभिषेक करोड़ों गुना फल देता है।

मंगलवार: चूंकि भगवान सुब्रह्मण्य मंगल ग्रह के स्वामी हैं, इसलिए मंगलवार को अभिषेक करना शुभ होता है।

 

महत्वपूर्ण सुझाव: भगवान सुब्रह्मण्य का अभिषेक करने के बाद, यदि संभव हो तो, गरीबों या छोटे बच्चों को दूध और फल दान करें ताकि भगवान स्वामी शीघ्र प्रसन्न हों।

 

पूजाफल से संबद्ध पुजारी भक्तों के नाम और गोत्र के साथ शास्त्रोक्त पूजा का अनुष्ठान पारंपरिक और शुद्ध तरीके से ऑनलाइन करते हैं। पूजा का पूरा वीडियो रिकॉर्डिंग भक्तों के व्हाट्सएप पर भेजा जाता है।

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